Karela ki kheti kab aur kaise karen करेला की खेती Ki संपूर्ण जानकारी

Angryhackaryt
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कुछ ही फसलें ऐसी जिनका किसान भाई अच्छा भाव देखने को मिलता है उन्हीं कुछ चंद फसलों में से एक फसल है करेला करेला के कई सारे औषधी गुण होने के कारण इसका मंडी थोक भाव किसान भाई को अच्छा देखने को मिलता है पर करेले की फसल किसान भाई के लिए कितने लाभदायक यह जानने के लिए हम इस article में एक एकड़ में लगाई गई करेली की फसल का संपूर्ण विश्लेषण

 इन पांच पॉइंट्स के आधार पर करेंगे नंबर वन मिट्टी और सही समय नंबर टू लागत नंबर थ्री उत्पादन नंबर फोर आमदनी नंबर फाइव प्रॉफिट कितना हुआ इसके साथ ही इस article के अंत में मैं आपको यहां भी बताऊंगा आप करेले की खेती में मचान विधि किस तरह से उपयोग में ला सकते और किस तरह से आप अपने खेत में बासवा तार का या मंडप बना सकते हैं 

मचान विधि से करना क्यों जरूरी है क्योंकि मचान विधि से परंपरागत विधि की तुलना में हमें उत्पादन डेढ़ गुना ज्यादा देखने को मिलता है मचान विधि से किस तरह से करें या जानने के लिए वीडियो को अंत तक जरूर देखें पहले पॉइंट पर आने से पहले जिन भी किसान भाइयों ने article को लाइक नहीं किया है तो व article को लाइक कर द अब हम आते हैं 

  करेले की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी और बीज बुवाई का सही समय क्या है 

तो देखिए किसान भाइयों आप करेले की खेती सभी तरह की मिट्टी में कर सकते हैं सिर्फ आपकी मिट्टी में सारे जरूरी पोषक तत्व मौजूद होने चाहिए बात करें मिट्टी के पीएच मान की तो मिट्टी का पीएच मान 6.5 से 7.5 के बीच में होना चाहिए गर्म शुद्र आद्र इस तरह की किताबी बातों में ना पड़ आप सिर्फ एक बात का ध्यान रखें कि करेले की फसल के लिए सबसे उपयुक्त तापमान 20 डिग्री से 40 डिग्री के बीच का रहता है 

इस तरह से आप करेले की खेती दो सीजन में कर सकते हैं गर्मी के सीजन में और बरसात के सीजन में गर्मी के सीजन में करेले की बीज बुआई का सबसे उपयुक्त समय फरवरी से लेकर 15 मार्च तक का है वह बरसात के सीजन में आप करेले के बीजों की बुआई 15 जून से लेकर जुलाई के महीने तक कर सकते हैं यानी कि आप करेले की खेती सभी तरह की मिट्टी में कर सकते हैं और बीज बुआई दो सीजन में कर सकते हैं गर्मी के सीजन और बरसात के सीजन आप करेले के बीजों की बुआई बेड बनाकर ही करें किस तरह से करें वह देखते हैं 

हमने 2 फीट चौड़े बेट बनाए हैं और बेट की बेट से दूरी 4 फीट ली है आप 4 से 5 फीट ले सकते हैं इसके साथ ही हमारी बेट की हाइट 14 इंच थी आप 10 इंच से लेकर 14 इंच बेट की हाइट रख सकते हैं अगर आपके यहां ड्रिप इरिगेशन सिस्टम इंस्टॉल है तो आप मल्चिंग पेपर का उपयोग अवश्य करें इसके लिए आप 255 माइक्रोन के मल्चिंग पेपर का उपयोग कर सकते हैं

अब बात आती है कि हमें होल से होल की दूरी क्या रखना है तो हम होल से होल की दूरी एक से 1 फीट रखेंगे हमने यहां पर 1 फीट होल से होल की दूरी ली वह इसके साथ ही एक होल पर हम दो बीजों का छिड़काव करेंगे आप देख सकते हैं कि हमने यहां पर दो बीज लगाए मिट्टी व सही समय के बाद आते हैं 

 एक एक में लगाई गई करेले की फसल में 2024 में हमारी कितनी लागत आती है 

तो देखिए अगर आप एक एकड़ में करेले की फसल लगाना चाहते और अगर आप हाइब्रिड किस्म के बीजों का चुनाव करते तो बीज की मात्रा 600 ग्राम के आसपास लगेगी वह वीएनआर आकाश 50 ग्राम के पैकेट की कीमत हमें ₹ के आसपास देखने को मिलती है हमें ऐसे कुल 12 पैकेट लगेंगे इस

तरह हमारा खर्च आएगा 7200 यानी कि एक एकड़ में लगाई गई करेले की फसल में बीच का खर्च आएगा 7200 खेत की तैयारी वह बेड मेकर का हमारा खर्चा आएगा 800 बेसल डोज की हमारी लागत आएगी 22404 वाटर सॉल्युबल फर्टिलाइजर प्लांट ग्रो टोनी और माइक्रो न्यूट्रेट इन सबका हमारा खर्च आएगा ₹ 700 अगर आप करेले की खेती मचान विधि से करते हैं तो बास तार धागा व लेबर का हमारा खर्च आएगा ₹2500000 करेले की फसल मेंहमें थ्रिप्स ए फिट्स वाइट फ्लाई मिलीबग माइड फ्रूट फ्लाई जैसे कीटों का अटैक देखने को मिलता है

इन कीटों से करेले की फसल को बचाने के लिए हम स्प्रे करते हैं जिसकी हमारी लागत आएगी 000 खेत से मंडी तक का ट्रांसपोर्ट चार्ज आएगा 4000 इन सब खर्च को जोड़कर एक एकड़ में लगाई गई करेले की फसल में 2024 में हमारी लागत आएगी 73104 देखिए इसमें हमने लेबर का कोई भी खर्च नहीं जोड़ा है

सिर्फ बांस तार व धागे की सहायता से हम करेले की बेलों को चढ़ाते मचान बनाते उसमें जो लेवल लगता है हमने उसका खर्चा जोड़ा है अगर आप करेले की खेती मचान विधि से नहीं करके हमारी परंपरागत विधि से करते तो आपकी लागत 25000 से कम हो जाती और आपकी लागत आएगी 4814 वट्टी सही समय व लागत के बाद आते हैं 

 एक एकड़ में लगाई गई करेले की फसल से कितना उत्पादन देखने को मिलता है 

देखिए आप गर्मी के सीजन में अगर करेले की फसल लगा रहे हैं तो आप करेले की खेती परंपरागत विधि से ही करें वह अगर आप बारिश के सीजन में करेले की फसल लगा रहे हैं तो आप बारिश के सीजन में करेले की खेती मचान विधि से ही करें आपको उत्पादन भी अच्छा देखने को मिलेगा साथ ही साथ बारिश के सीजन में करेले की फसल पर ज्यादा कीट व रोग का अटैक होता है और मचान विधि से आपकी करेले की फसल पर कम अटैक देखने को मिलेगा

 जब हम परंपरागत विधि से करेले की फसल लगाते तो हमारा उत्पादन 60 क्विंटल से लेकर 70 क्विंटल के बीच में जाता है वह अगर आप बारिश के सीजन में करेले की फसल लगाते तो मचान विधि से आपका उत्पादन 100 से 120 क्विंटल के आसपास जाता है तो हमारा उत्पादन गर्मी के सीजन में परंपरागत विधि से हुआ 60 क्विंटल और बारिश के सीजन में मचान विधि से हुआ सौकन मचान विधि से करेले की फसल किस तरह से लगाए या हम जानेंगे प्रॉफिट निकालने के बाद में अब हम आते हैं 

 एक एकड़ में लगाई गई Karela ki kheti से 2024 में कितनी आमदनी देखने को मिलेगी  

करेले का भाव जैसा कि मैंने article के शुरू में कहा था कि हमें अच्छा ही देखने को मिलता है और यह पूरे ही साल अच्छा रहता है करेले का मंडी थोक भाव कम से कम ₹10 तक ही जाता है और ज्यादा से ज्यादा या ₹ 35 तक भी चला जाता है पर अगर हम पूरे साल का एक एवरेज मंडी ठोक भाव निकाले तो यहां ₹1 के आसपास हमें देखने को मिलेगा हम अभी के लिए ₹ किलो करेले का मंडी थोक भाव लेते हैं 

परंपरागत विधि में हमारा उत्पादन हुआ था 60 और एक क्विंटल में 100 किलो होता है और एक किलो का हमने मंडी थोक भाव लिया है 15 इस तरह हमारी आमदनी हुई 00 यानी कि परंपरागत विधि से हमारी आमदनी हुई 00 मचान विधि से हमारा उत्पादन हुआ था 100 क्विंटल और एक क्विंटल में 100 किलो होता है और एक किलो का हमने मंडी ठोक भाव दिया है ₹ इस तरह हमारी आमदनी हुई ₹ लाख यानी कि मचान विधि से एक एकड़ में लगाई गई करेले की फसल से हमारी आमदनी हुई ₹ लाख 

अब हम आते हैं हमारे पांचवे पॉइंट प्रॉफिट पर प्रॉफिट निकालने के लिए हम कुल आमदनी में से लाधक को घटा देंगे तो जो भी आंकड़ा आएगा वह हमारा प्रॉफिट रहेगा तो देखिए किसान भाइ परंपरागत विधि से हमारी आमदनी हुई थी ₹ हज वो लागत आई 8104 इस तरह हमारा प्रॉफिट रहा 896 यह हमारा परंपरागत विधि से था अब हम बात करते हैं मचान विधि से तो मचान विधि में हमारी आमदनी हुई थी ₹ लाख और हमारी लागत आई 73104 तो हमारा प्रॉफिट रहा 896 जैसा कि आप देख ही सकते हैं कि मचान विधि से हमें ज्यादा प्रॉफिट देखने को मिलता है हां हमारी लागत भी ज्यादा आती है

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